हम आपको बता रहे हैं मध्यप्रदेश उन सभी 24 विधानसभा सीटों का जहां पर जल्द ही उपचुनाव की घंटी बज सकती है. पिछले चुनाव के नतीजे इन सीटों पर क्या रहे थें, उन पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट देखिए.

Kamal Nath, Shivraj Chouhan trade barbs in MP Assembly over using ...

1. जौरा विधानसभा क्षेत्र : इस विधानसभा क्षेत्र से पिछली बार कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा 56187 वोट पाकर निर्वाचित हुए थें. उन्होंने बसपा उम्मीदवार मणिराम धाकड़ को 15173 वोटों से पराजित किया था. बसपा को 41014 वोट हासिल हुए थें. इस सीट पर भाजपा बेहद कमजोर स्थिति में थी. भाजपा प्रत्याशी सूबेदार सिंह को तीसरा स्थान और 37988 वोट प्राप्त हुए थें. महान दल के प्रत्याशी के रुप में अटार सिंह गुर्जर को 17167 वोट मिले थें. यह सीट कांग्रेस विधायक के निधन के कारण खाली हुई है. इस सीट पर ब्राह्मण, धाकड़, क्षत्रिय, कुशवाह और मुस्लिम वोट काफी प्रभावशाली माने जाते हैं.

2. आगर मालवा विधानसभा क्षेत्र : यह सीट भाजपा विधायक मनोहर उंटवाल के निधन की वजह से रिक्त हुई है. अनुसूचित जाति के लि आरक्षित इस सीट पर शुरु से ही जनसंघ और फिर बाद में भाजपा का वर्चस्व रहता आया है. इस सीट पर अब तक छह बार भाजपा चुनाव जीत चुकी है. इस सीट पर सोंध्या जाति के मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली है. वहीं एससी, एसटी वोटरों की संख्या 80 हजार से भी ज्यादा है. विगत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को इस सीट पर कड़ी चुनौती पेश की थी. भाजपा उम्मीदवार मनोहर उंटवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी विपिन वानखेड़े को मात्र 2490 वोटों से शिकस्त दी थी. मनोहर उंटवाल को 82146 वोट जबकि वानखेड़े को 79656 वोट हासिल हुए थें.

3. ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र : कांग्रेस उम्मीदवार प्रद्युमन सिंह तोमर ने भाजपा के जयभान सिंह पवैया को 21044 वोटों से पराजित किया था. तोमर को 92055 वोट जबकि पवैया को 71011 वोट हासिल हुए थें. इस सीट से 2003 के बाद कोई भी विधायक दूसरी बार चुनाव जीत कर विधानसभा नहीं पहुंच सका है. 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां किसी भी तीसरे दल का कोई खास असर नहीं था.

4. ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र : विगत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहे मुन्ना लाल गोयल ने भाजपा उम्मीदवार सतीश सिंह सिकरवार को 17819 वोटों से परास्त किया था. गोयल को 90133 वोट जबकि सिकरवार को 72314 वोट मिले थें. इस सीट पर अब तक 10 बार हुए विधानसभा चुनाव में 08 बार भाजपा जीत चुकी है. कांग्रेस महज 02 बार ही कामयाब हो पाई है. इस सीट पर जातिगत समीकरणों का कोई खास असर देखने को नहीं मिलता है.

5. डबरा विधानसभा क्षेत्र : वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर इमरती देवी ने भाजपा के कप्तान सिंह सहसारी को पराजित किया था. इमरती देवी को 90598 जबकि कप्तान को 33152 वोट मिले थें. बसपा का भी इस सीट पर आधार देखने को मिला था. बसपा प्रत्याशी प्रताप सिंह मंडेलिया को भी 13155 वोट हासिल हुए थें. इस विधानसभा क्षेत्र में जाटव, रावत, ब्राह्मण औ मुस्लिम समाज के वोट निर्णायक होते हैं. यहां सड़क और पानी जैसी समस्याओं को लेकर इमरती देवी के खिलाफ जनता में नाराजगी देखने को मिल रही है.

6. बमोरी विधानसभा क्षेत्र : विगत विधानसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के महेंद्र सिंह सिसोदिया को 64598 वोट मिले थें जबकि भाजपा प्रत्याशी बृजमोहन आजाद को 36678 वोट हासिल हुए थें. इस विधानसभा क्षेत्र में सहरिया आदिवासी और एससी मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली है. इनकी संख्या 80 हजार के करीब है जबकि किरार और धाकड़ समाज का भी अच्छा खासा वोट इस इलाके में माना जाता है.

7. सुरखी विधानसभा क्षेत्र : इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत ने भाजपा के सुधीर यादव को पराजित किया था. कांग्रेस प्रत्याशी को 80806 जबकि भाजपा प्रत्याशी को 59388 वोट मिले थें. इस विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरणों की बजाय बाहुबल और धनबल का जोर चलता है.

8. सांची विधानसभा क्षेत्र : इस सीट से कांग्रेस के डॉ प्रभुराम चौधरी ने भाजपा के मुदित शेजवार को 10813 वोटों से हराया था. यह सीट एससी के लिए आरक्षित है. चौधरी को कुल 89567 वोट जबकि शेजवार को 78754 वोट मिले थें. इस क्षेत्र में एससी वोटरों की तादाद 50 हजार से भी ज्यादा है और इनका रुझान कांग्रेस की ओर रहता है. इनके अलावा मुस्लिम, लोधी और किरार वोट भी काफी मायने रखते हैं. शेजवार परिवार का भी इस सीट पर वर्चस्व रहता आया है.

9. सांवेर विधानसभा क्षेत्र : कांग्रेस के तुलसीराम सिलावट ने विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ राजेश सोनकर को महज 2945 वोट से पराजित किया था. सिलावट को 96935 जबकि सोनकर को 93590 वोट हासिल हुए थें. ये सीट एससी के लिए आरक्षित है और ये इंदौर संसदीय क्षेत्र के तहत आता है. इस सीट पर कोई भी उम्मीदवार दूसरी बार नहीं जीत पाता है. एससी मतदाताओं की काफी संख्या है.

10. सुमावली विधानसभा क्षेत्र : विगत चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी एदल सिंह कंसाना ने भाजपा के अजाब सिंह कुशवाहा को पराजित किया था. कंसाना को 65455 वोट, कुशवाह को 52142 वोट जबकि तीसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह गांधी को 31331 वोट हासिल हुए थें. इस सीट पर जातीय समीकरणों का जोर रहता है. यहां पर गुर्जर, सिकरवार, ब्राह्मण, कुशवाह आदि जातियों का वोट काफी मायने रखता है. पिछली बार इस सीट पर त्रिकोणिय संघर्ष देखने को मिला था.

11. मुरैना विधानसभा क्षेत्र : इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रघुराज सिंह कंसाना ने 68965 वोट प्राप्त कर भाजपा के रुस्तम सिंह को 20849 वोटों से हराया था. रुस्तम को 48116 वोट मिले थें. वहीं तीसरे स्थान पर रही बसपा के बलवीर सिंह को 21149 वोट हासिल हुए थें. मुरैना में सबसे ज्यादा वोटर गुर्जर समुदाय के हैं. इनकी संख्या करीब 60 हजार के आसपास है.

12. दिमनी विधानसभा क्षेत्र : दिमनी विधानसभा क्षेत्र में करीब 60 हजार राजपूत वोटर हैं. इसके बाद ब्राहमण मतदाताओं का नंबर आता है. पिछले चुनाव में कांग्रेस के गिरिराज दंडोतिया ने भाजपा के शिव मंगल सिंह तोमर को 18477 वोटों से हराया था. दंडोतिया को 69597 वोट जबकि तोमर को 51120 वोट मिले थें.

13. अंबाह विधानसभा क्षेत्र : विगत चुनाव में कांग्रेस के कमलेश जाटव ने 37343 वोट प्राप्त कर निर्दल प्रत्याशी नेहा किन्नर को पराजित किया था. नेहा को 29796 वोट मिले थें जबकि भाजपा प्रत्याशी गब्बर सखवार 29715 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहें. वैसे तो यह सीट एससी के लिए आरक्षित है लेकिन यहां सर्वाधिक संख्या क्षत्रिय और सखबार मतदाताओं की है. तीसरे नंबर पर ब्राह्मण मतदाता हैं.

14. मेंहगाव विधानसभा क्षेत्र : कांग्रेस प्रत्याशी ओपीएस भदौरिया ने भाजपा के राकेश शुक्ला को चतुष्कोणिय मुकाबले में 25814 वोटों से हराया था. भदौरिया को जहां 61560 वोट तो शुक्ला को 35746 वोट मिले थें जबकि बीएसडी के रणजीत सिंह गुर्जर को 28160 और रालोसपा के डॉ राजकुमार सिंह कुशवाहा को 15307 वोट मिले थें. इस सीट पर भदौरिया ठाकुर, बघेल, नरवरिया, राठौर, जैन और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव रहता है.

15. गोहद विधानसभा क्षेत्र : एससी के लिए आरक्षित इस सीट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस के रणवीर जाटव चुने गए थें. जाटव को जहां 62981 वोट मिलें तो भाजपा प्रत्याशी लाल सिंह आर्य को 38992 वोट हासिल हुए थें. जीत का अंतर 23989 था. इस सीट पर तोमर ठाकुर, ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और जैन समाज के मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली है.

16. भांडेर विधानसभा क्षेत्र : एससी के लिए आरक्षित इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रक्षा देवी ने भाजपा की रजनी प्रजापति को 39896 वोटों से पराजित किया था. रक्षा देवी को जहां 73569 वोट मिले थें तो वहीं रजनी प्रजापति को 33673 वोट हासिल हुए थें. इस सीट पर ओबीसी मतदाताओं की काफी संख्या मानी जाती है, तो जीत हार तय करते हैं.

17. करेरा विधानसभा क्षेत्र : यह विधानसभा क्षेत्र भी एससी के लिए सुरक्षित है. इस सीट पर बसपा का भी प्रभाव देखने को मिलता है. इस सीट पर करीब 70 हजार एससी वोटर हैं जिनमें लगभग 45 हजार वोटर जाटव समुदाय के हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जसमंत चित्री ने भाजपा के राजकुमार को हराया था. चित्री को जहां 64201 वोट जबकि राजकुमार को 49377 वोट मिले थें. वहीं बसपा के प्रागीलाल को 40026 वोट मिले थें.

18. पोहरी विधानसभा क्षेत्र : पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश धाकड़ को 60654 वोट मिले थें जबकि भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती 37268 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थें. दूसरा स्थान बसपा के कैलाश को मिला था. ये सीट धाकड़ और ब्राह्मण बहुल है.

19. अशोक नगर विधानसभा क्षेत्र : यह विधानसभा सीट एससी के लिए आरक्षित है. पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जजपाल सिंह जज्जी ने 65750 वोट प्राप्त कर भाजपा के लड्डुराम कोरी को 9730 वोटों से हराया. कोरी को 56020 वोट मिले थें. बसपा प्रत्याशी को भी 9559 वोट मिले. चूंकि यह सीट एससी के लिए आरक्षित है इसलिए यहां जातीय समीकरणों का बहुत ज्यादा जोर नहीं चलता है.

20. मुंगावली विधानसभा क्षेत्र : इस सीट पर करीब 42 हजार एससी एसटी वोटर हैं जबकि यादव 34 हजार, ब्राह्मण 10 हजार के आसपास हैं. मुस्लिम, दांगी, कुशवाह वोटर भी प्रभावशाली हैं. पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार ब्रजेंद्र सिंह यादव ने भाजपा के कृष्णपाल सिंह यादव को 2136 वोटों से हराया था. इस सीट पर कांग्रेस के यादव जी को 55346 वोट जबकि भाजपा के यादव जी को 53210 वोट मिले थें जबकि बसपा के कमलेश दांगी 14202 वोट बंटोरने में कामयाब हुए.