कांग्रेस नेतृत्व ने राजस्थान संकट पर बड़ा फैसला ले लिया है. सचिन पायलट को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया है. सचिन पायलट को शायद ज्यादा अहंकार हो चुका है कि बस उन्हीं की वजह से कांग्रेस राजस्थान में जिंदा है बाकी सारे नेता और कार्यकर्ता उनके आगे शून्य हैं.

कांग्रेस ने यह दिखा दिया है कि संगठन से बड़ा कोई नहीं होता. सचिन पायलट के साथ ही उनके दो समर्थक मंत्रियों की भी छुट्टी कर दी गई है. कांग्रेस ने सचिन पायलट की जगह गोविंद सिंह दोतासारा को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. वहीं पायलट के दो समर्थक मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को उनके पद से हटा दिया है.

दरअसल सचिन पायलट भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते पर चलकर पार्टी को ब्लैकमेल करने के चक्कर में थें और लगातार 30 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे थें लेकिन गहलोत निकले राजनीति के बड़े मंझे हुए खिलाड़ी. उन्होंने कल ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जिसमें 109 विधायक शामिल हुए. 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में बहुमत के लिए 101 विधायकों की जरुरत होती है.

नंबर गेम में गहलोत ने पायलट को कल ही शिकस्त दे दी थी. कांग्रेस नेतृत्व भी सचिन पायलट की इस हरकत के लिए माफ करने के मूड में नहीं दिखा. आज पायलट को हटा कर सीधा संकेत दे दिया गया कि जाओ, भाजपा में, वहां जाकर मुख्यमंत्री बन जाना जैसे ज्योतिरादित्य बन गया मध्य प्रदेश में.