सासाराम विधानसभा क्षेत्र इन दिनों हॉट सीट बना हुआ है. वजह है कि दो बार राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर निर्वाचित हुए वर्तमान विधायक डॉ अशोक कुमार सिंह ने जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण कर ली है. इसके बाद तो जैसे इस सीट पर राजद के दावेदारों की बाढ़ आ गई है. परंपरागत तौर पर अभी तक इस सीट पर सभी प्रमुख दल कुशवाहा जाति के उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारते आ रहे थें लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में राष्ट्रीय जनता दल नेतृत्व सासाराम से वैश्य उम्मीदवार को उतारने पर गहन चिंतन कर रहा है.

एनडीए के लिए खतरे की घंटी

दरअसल सासाराम में वैश्य मतदाताओं की संख्या लगभग 75 हजार बताई जाती है. वैश्य समाज को भाजपा एवं एनडीए का मजबूत कैडर माना जाता है. शायद इसी संख्या बल को ध्यान में रखते हुए निवर्तमान विधायक ने पाला बदल लिया हो. अब तक अधिकतम वैश्य वोट भाजपा उम्मीदवारों को ही मिलते रहे हैं. अब इस वोट बैंक पर राजद की निगाहें लग गई है. दरसअल 40 साल से एक ही वर्ग के विधायक और उम्मीदवारों को लेकर क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी में असंतोष भी देखने को मिल रहा है. ऐसे में अगर राजद सासाराम विधानसभा क्षेत्र से किसी वैश्य उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारता है तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं और पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो सकते हैं.

पूर्व नगर परिषद उपाध्यक्ष की दावेदारी

सासाराम विधानसभा सीट पर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रतिष्ठित व्यवसायी सुरेंद्र कुमार अग्रवाल ने भी अपनी दावेदारी पेश की है. सुरेंद्र कुमार अग्रवाल एक राजनीतिक सह व्यावसायिक पृष्ठभूमि से आते हैं. उनके पिताजी स्वर्गीय जगदीश चंद्र अग्रवाल भी लंबे समय तक सासाराम नगरपालिका के चेयरमैन रह चुके हैं. पेशे से आभूषण व्यवसायी सुरेंद्र कुमार अग्रवाल ने वाणिज्य और कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की है. दस वर्ष तक पार्षद रहे अग्रवाल नगर परिषद उपाध्यक्ष के अलावा नगर परिषद की सशक्त स्थायी समिति एवं जिला योजना समिति के सदस्य भी रहे हैं.

सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में सक्रिय

 

सुरेंद्र कुमार अग्रवाल श्रीकृष्ण गौशाला, महावीर मंदिर न्यास समिति, श्रीराम चरित मानस संघ, सासाराम वैश्य महासम्मेलन, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के माध्यम से भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं. इसके अलावा लायंस क्लब एवं चैंबर ऑफ कॉमर्स में भी विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं.

राजद प्रमुख से पुरानी नजदीकी

राजद के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर चुके सुरेंद्र कुमार अग्रवाल के पिता स्वर्गीय जगदीश चंद्र अग्रवाल 1986 से 1991 तक निर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष रहें जबकि 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पुनः सासाराम नगरपालिका के चेयरमैन के पद के लिए मनोनीत किया.

 

क्षेत्र में ईमानदार छवि

लंबे समय तक पार्षद, नगर परिषद उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रहने के बावजूद अग्रवाल पर भ्रष्टाचार का एक छींटा भी नहीं पड़ सका. बेदाग छवि के साथ सुरेंद्र कुमार अग्रवाल सासाराम विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी के लिए प्रयासरत हैं. इनके बारे में एक तथ्य यह भी चर्चा में आ रही है कि इन्हे राजद एवं महागठबंधन के परंपरागत वोटरों के अलावा समाज के सभी वर्गों में स्वीकार्यता हासिल है जिससे की एनडीए उम्मीदवार को कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है.

ये भी रेस में

इनके अलावा राजद के मजबूत दावेदारों में शिवंत कुशवाहा, उमेश सिंह, संजय सिंह भी शामिल माने जा रहे हैं. आखिरी फैसला राजद नेतृत्व का होगा कि वो किस सेनापति को सासाराम विधानसभा की जंग में उतारते हैं.