बिहार में सातवीं बार सीएम पद की शपथ लेकर नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड कायम कर दिया है. फर्क सिर्फ इतना है कि पहले नीतीश कुमार एक मजबूत सीएम हुआ करते थें और अब भाजपा के रहमोकरम पर पल रहे एक लाचार, कमजोर और बेबस मुख्यमंत्री हैं. पहले वो मुख्यमंत्री सचमुच में हुआ करते थें और अब सिर्फ दिखावे के लिए हैं.

बद से बदतर हुई कानून व्यवस्था

इसके साथ ही बिहार में कानून व्यवस्था का हाल बद से बदतर हो चुका है. अपहरण उद्योग का दौर शुरु हो चुका है. हत्याओं की कोई गिनती ही नहीं है. इसके अलावा छिनतई, लूट, डकैती की घटनाओं की कोई गिनती ही नहीं है. एक तरह से कह सकते हैं कि बिहार में अब सचमुच जंगलराज रिर्टन हो चुका है. वहीं नीतीश कुमार इन मुद्दों पर खामोश हैं.

आईसीयू में सरकार

जिस प्रकार से नीतीश कुमार की नई सरकार में भाजपा मजबूती से अपनी हनक दिखा रही है, उससे जदयू के कई विधायकों में निराशा का माहौल दिखाई दे रहा है. जदयू के कई विधायकों को लगने लगा है कि मुख्यमंत्री तो जदयू का है लेकिन सरकार भाजपा की है. होगा वही, जो भाजपा चाहेगी और सबसे बड़ी बात तो यह है कि आज की तारीख में बिहार में जमीन पर जदयू और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच संबंध लगातार तीखे होते जा रहे हैं. समन्वय और संबंध दोनों ही समाप्त हो चुके हैं.

अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही. कानून व्यवस्था की दशा बिगड़ती रही तो भाजपा के साथ बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का बहाना मिल सकता है और वो नीतीश कुमार की सरकार को बर्खास्त कर नया दांव खेल सकती है, वैसे भी जितनी तेजी से नीतीश का ग्राफ बिहार में गिरता जा रहा है, भाजपा उन्हें बहुत दिन बर्दाश्त नहीं करने वाली है. ऐसे में जो पटकथा लिखी जा रही है, वो बेइज्जती के साथ नीतीश कुमार की विदाई है.