वो एक नौजवान है. उम्र है 38 साल. पश्चिम बंगाल के मुसलमानों के बीच जबर्दस्त प्रभाव रखने वाले फुरफुरा शरीफ के पीरजादा हैं और नाम है उनका पीरजादा अब्बास सिद्दीकी. पश्चिम बंगाल की मुस्लिम राजनीति में नया चेहरा बनकर उभरे हैं. पीरजादा अब्बास सिद्दीकी कभी टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बड़े समर्थक हुआ करते थें लेकिन अब वो ममता बनर्जी के विरोधी हैं.

Assembly elections: On January 21, Pirzada Abbas Siddiqui will form a new  party, will contest elections together with Owaisi - The Indian Print |  DailyHunt

पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की मुलाकात कुछ दिन पहले ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुसलिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से भी हुई थी, जिस के ओवैसी ने कहा था कि बंगाल में वो वही करेंगे जो पीरजादा अब्बास सिद्दीकी कहेंगे लेकिन सिद्दीकी ने अपना रास्ता बदल दिया है. उन्होंने अपनी नई पार्टी का गठन कर लिया है, जिसका नाम है इंडियन सेकुलर फ्रंट.

पीरजादा अब्बास सिद्दीकी बताते हैं कि इंडियन सेकुलर फ्रंट यानी आईएएफ पश्चिम बंगाल की राजनीति का किंग मेकर बनने की इच्छा रखती है. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटे हैं और इनमें से 100 से ज्यादा सीटों पर फुरफुरा शरीफ का प्रभाव है. वहीं फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के गठबंधन में शामिल होने की तैयारी में हैं.

Mamata created communal divide, did more harm to Muslims: Abbas Siddiqui-  The New Indian Express

बताया तो यहां तक जा रहा है कि सीट बंटवारे को लेकर पीरजादा अब्बास सिद्दीकी, पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमिटी और लेफ्ट पार्टियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है.

दो दिनों पूर्व पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने सियालदह से धर्मतल्ला तक विशाल रैली निकाली जिसमें हजारों लोग शामिल हुए. दिलचस्प बात तो यह रही कि पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की यह रैली एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की कोलकाता यात्रा से ठीक पहले हुई है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा स्पष्ट रुप से चल रही है कि सिद्दीकी ने अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास ओवैसी को कराने के लिए यह रैली निकाली थी और पीरजादा अब्बास सिद्दीकी अपनी ताकत का एहसास करने में कामयाब भी रहें.

जाहिर है कि अब पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने ओवैसी की मुश्किलें बढ़ा दी है. जिस प्रकार से पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी आईएएफ में शामिल होने के लिए मुस्लिम नौजवानों में होड़ मची है, वो ओवैसी के लिए खतरे की घंटी की तरह है. विशेष तौर पर पश्चिम बंगाल में पार्टी का खाता खोलने के लिए संकल्पित ओवैसी इस विधानसभा चुनाव में कोई फैक्टर बचेंगे भी या नहीं… यह कहना मुश्किल है, पर इतना तो तय है कि पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने बंगाल में ओवैसी की जड़ेें खोद दी है.