कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा से विदाई हो गई है. आजाद कांग्रेस के उन 23 नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने पिछले साल अगस्त में पत्र लिखा था. कांग्रेस को मजबूत करने के लिए आजाद एक बार फिर से बैटल फील्ड तैयार कर रहे हैं, और इसके लिए जम्मू की धरती को चुना गया है.

दूसरे बागियों का मिलेगा साथ

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक गुलाम नबी आजाद को इस बार कपिल सिब्बल, विवेक तनखा, अखिलेश सिंह, मनीष तिवारी और भूपिंदर सिंह हुड्डा का भी साथ मिल सकता है. इस एकता के कई मायने हैं. कांग्रेस और देश की राजनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

पार्टी कर रही नजरअंदाज

दरअसल गुलाम नबी आजाद को इस बात का दुख है कि पार्टी लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है. कांग्रेस के कई सहयोगी दलों का मानना था कि आजाद को किसी दूसरे प्रदेश से राज्यसभा भेज दिया जाए लेकिन नेतृत्व इसके लिए तैयार नहीं हुआ. वहीं डीएमके और कांग्रेस के बीच रिश्तों की पकड़ रखने वाले आजाद को इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे की टीम में नहीं रखा गया.

जम्मू बनेगा बैटल फील्ड

वरिष्ठ नेता आंनद शर्मा का राज्यसभा में 01 वर्ष का कार्यकाल बचा है लेकिन उन्हें कांग्रेस की ओर से विपक्ष का नेता नामित नहीं किया गया और नही उनके नाम पर विमर्श किया गया. कांग्रेस ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद कर्नाटक से आने वाले वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को दे दिया गया. खड़गे को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है.

इन राज्यों के चुनाव पर रहेगी नजर

अगले कुछ दिनों में होने वाले तमिलनाडु, केरल, असम, बंगाल आदि प्रदेशों के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा होता है, इस पर विक्षुब्ध गुट की निगाहें रहेंगी. अगर कांग्रेस हमेशा की तरह हार की हताशा के साथ चुनावों से वापस लौटती है तो ये टीम मुखर होगी और कांग्रेस के अंदर एक बार फिर से वर्चस्व की लड़ाई तेज होगी.