बिहार की राजनीति में पहली बार एक नया प्रयोग होने जा रहा है और ये प्रयोग करने जा रहे हैं लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान का. विगत बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार से दो दो हाथ कर चुके चिराग पासवान इन दिनों नई रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं. दरअसल चिराग पासवान बिहार में पासवान और ब्राह्मणों को कॉकटेल तैयार कर रहे हैं, जो 12 प्रतिशत वोट के साथ मजबूत विकल्प के तौर पर सामने आ सकता है.

Bihar Politics LJP President Chirag Paswan forms Dalit Savarna alliance Raju  Tiwari becomes executive president

पासवान जाति आज भी लोजपा का मजबूत आधार वोट हैं. लोजपा चाहे यूपीए के साथ रहे या एनडीए के या फिर अकेले मैदान में उतरे, पासवान जाति लोजपा के साथ ही जाता रहा है. वहीं ब्राह्मण कभी कांग्रेस के कोर वोटर हुआ करते थें लेकिन अब उनका झुकाव भाजपा की तरफ है.

बिहार में भाजपा ने दो उपमुख्यमंत्री बनाएं हैं. अपना स्पीकर बनाया है लेकिन कोई भी ब्राह्मण नहीं है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी ब्राह्मण नहीं है, इसे लेकर बिहार के ब्राह्मणों में नाराजगी है, जिसे चिराग पासवान भुनाना चाहते हैं. क्योंकि जिस प्रकार के हालात एनडीए में बनते जा रहे हैं, वैसे में चिराग पासवान का इस गठबंधन में ज्यादा दिन तक रहना मुश्किल लग रहा है, ऐसे में चिराग को नए सियासी समीकरण तो बनाने ही होंगे.

यही वजह है कि चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के पूर्व विधायक राजू तिवारी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. बिहार मंे लगभग 06 प्रतिशत ब्राह्मण आबादी है और इतनी ही आबादी पासवान जाति की है. दोनों जातियों के मतदाताओं को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 12 प्रतिशत तक पहुंच जाता है.

चिराग की नजर 2025 के विधानसभा चुनाव पर है. इसके लिए तैयारियां उन्होंने अभी से ही शुरु कर दी है. इस समीकरण को मजबूत करने के लिए उन्हें एक खांटी ब्राह्मण चेहरे की जरुरत थी. जिसके लिए उन्होंने पूर्व विधायक राजू तिवारी को चुना और उन्हें बिहार लोजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया.

राजू तिवारी का संक्षिप्त परिचय यह है कि वो ब्राह्मणों के गढ़ के रुप में जाने जाने वाले गोविंदगंज विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं और पूर्व विधायक राजन तिवारी के भाई हैं. अब राजू तिवारी को यह जिम्मेवारी दी गई है कि वो लोजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करें.