गुजरात निकाय चुनाव में कांग्रेस की शर्मनाक पराजय के बाद कांग्रेस का एक और युवा नेता उसे अलविदा कह सकता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं कांग्रेस के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का… सूरत नगर निगम जिसे पाटीदारों का गढ़ कहा जाता है, वहां संपन्न हुए चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से हार का मुंह देखना पड़ा है.

इस हार के बाद हार्दिक पटेल ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. हार्दिक ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस में कुछ ऐसे नेता हैं जो उन्हें नीचे खींचने की कोशिश में हैं. हार्दिक ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी उनका ठीक तरीके से इस्तेमाल नहीं कर रही.

मालूम हो कि गुजरात में अगले साल ही विधानसभा के चुनाव हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गुजरात भले ही न जीत सकी थी लेकिन उसने भाजपा का किला तो हिला ही दिया था लेकिन इस बार कांग्रेस की हालत और खराब होती जा रही है. उपर से औवेसी और आप लगातार कांग्रेस का वोट काट रही है और भाजपा को बिना मांगे मुंह में मोती मिलता जा रहा है.

हार्दिक ने कहा कि उन्होंने पिछले 10 दिनों में 27 रैलियां की लेकिन उसमें उन्हें पार्टी का कोई सहयोग नहीं मिला, जो भी किया, वो खुद अपने दम पर किया. नगर निगम चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस ने एक भी सार्वजनिक बैठक नहीं की. इस दौरान कांग्रेस ने गुजरात कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल को याद करते हुए कहा कि आज अगर वो जिंदा होते तो इस तरह से भाजपा को फायदा होने नहीं देते.

कांग्रेस को आईना दिखाते हुए हार्दिक ने कहा कि कांग्रेस को ये बात समझनी होगी उन्हें गुजरात में पिछले दिनों जिन चुनावों मंे भी फायदा हुआ, वो ओबीसी आंदोलन की वजह से हुआ. प्रदेश कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आंदोलन से जन्मे हैं और पार्टी में शामिल हुए हैं, कांग्रेस को उन्हें समझना होगा. हार्दिक ने कहा कि उनके एक दिन के दौरे का भी फैसला प्रदेश कांग्रेस नहीं करती है.


हालांकि हार्दिक ने पार्टी छोड़ने जैसी बातों से इंकार करते हुए कहा कि मुझे और कुछ नहीं चाहिए. मैं चाहता हूं कि पार्टी मुझे काम दे. मैं एक दिन में 25 बैठकें और 500 किलोमीटर की पदयात्रा करने को तैयार हूं. मैं कांग्रेस को मजबूत करना चाहता हूं लेकिन स्थानीय नेतृत्व मुझे ये करने देना नहीं चाहता.