देश के खूबसूरत प्रदेशों में से एक उत्तराखंड.. देवभूमि यानी देवताओं की भूमि के रुप में अपनी पहचान रखने वाला प्रदेश उत्तराखंड.. यूं तो अपनी नैसर्गिक खूबसूरती कारण जाना जाता है लेकिन बात करें राजनीति की तो हमेशा अस्थिर रहने वाले प्रदेश के रुप में उत्तराखंड की पहचान बनती जा रही है.

उत्तराखंड में इन दिनों भाजपा की सरकार है. पिछले चार सालों से वहां भाजपा सरकार चला रही थी. त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री थें. अचानक से भाजपा में बगावत की बू आने लगी तो हाईकमान ने खतरे को भांप लिया और तत्काल नेतृत्व परिवर्तन कर दिया. अब तीरथ सिंह रावत यहां के मुख्यमंत्री हैं.

लेकिन क्या नेतृत्व परिवर्तन करने से उत्तराखंड में भाजपा की सरकार वापस आ पाएगी ! सवाल बनता है क्योंकि उत्तराखंड में भी अगले साल ही विधानसभा के चुनाव होने हैं.

उत्तराखंड में भाजपा सरकार के 04 साल पूरे होने पर यहां एबीपी न्यूज और सीवोटर ने सर्वे किया. सर्वे में साफ साफ बताया जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में यहां पीएम मोदी का जादू नहीं चलने वाला है. सीएम बदलने का भी यहां भाजपा को कोई फायदा होने वाला नहीं है.

एबीपी न्यूज और सीवोटर का सर्वे साफ साफ बता रहा है कि इस बार उत्तराखंड में भाजपा का सफाया हो सकता है और कांग्रेस की सरकार बन सकती है.

सर्वे के अनुसार अगर अभी उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होते हैं तो कांग्रेस को लगभग 41 प्रतिशत और भाजपा को 38 प्रतिशत वोट मिल सकता है. बात करें मायावती की पार्टी बसपा की तो बसपा को महज 04 प्रतिशत वोट इस प्रदेश में मिलने की संभावना है.

इस आंकड़े को सीटों में तब्दील करें तो 70 सदस्यों वाली उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस को 38 सीटें तक मिलने वाली हैं. पिछली बार कांग्रेस को महज 11 सीटों पर संतोष करना पड़ा था.

जबकि भाजपा को 24 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है. वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 57 सीटें मिली थीं.

वहीं बसपा को शून्य से 06 और आम आदमी पार्टी को 02 से 08 तक सीटें मिल सकती हैं. अन्य को भी 03 सीटें मिल सकती हैं.

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